Himalayan Calendar 2023

It is said that our dreams are the gateways to the metaphysical world. A dream can transfer you from your bedroom to a dreamy place.But wait.. what do you see in your dreams??As per bio-physics, our mind can create only those scenes in our dreams that we have experienced already or seen somewhere (whether itContinue reading “Himalayan Calendar 2023”

सफलता या सजगता?

मैं और आप हर दिन बदल रहे हैं। हम सभी आगे की ओर बढ़ रहे हैं। हर देश प्रगति की ओर अग्रसर है। मानव धरती से ऊँचा उठ, चाँद से होता हुआ ब्रहस्पति को पार कर अरुण (Uranus) ग्रह तक जा पहुँचा है। मगर इस यात्रा का परिणाम क्या है?  पैदा होने से जीवन के अंतContinue reading “सफलता या सजगता?”

Ghepan Lake Trek (The Longest Lake of Himachal)

The beauty of the trek lies not just in the destination – Ghepan lake but the entire route stitches the pieces of beauty together in the form of a jewel. The Gaddi community (shepherds) you will encounter on the way will take you back to the times of nomadic life. Their tentative houses of stones made without any mortar will leave you contesting the greatest engineers of modern times. The green pastures of plain land at an elevation of 11,000 Ft and the dry terrain of the surrounding mountain peaks will give you a glimpse of Tibet.

जंगल के बीच घास का मैदान

किसी नन्ही चिड़िया का चहकना,

पूर्णतः नीले आसमान के कैन्वस में पीले सूरज का चमकना,

चमकते सूरज  की तपिश से घास का पीला पड़ना,

वर्ष की आख़िरी स्वादिष्ट दावत का,

लुत्फ़ उठा घोड़ों का हिनहिनाना

व्यस्त दुनिया

शब्दों और अर्थों में फँसी है ये दुनिया, जज़्बातों,एहसासों से परे है ये दुनिया, ना दिन का पता ना रात का ठिकाना, इन्हें तो बस निरंतर दौड़ते जाना,  जीने की तरकीबें ढूँढे हर कोई, पर खुद ज़िंदगी से परे है ये दुनिया,  अस्त व्यस्त सी पड़ी है ये दुनिया,  हौसलों को अस्त कर, ना जानेContinue reading “व्यस्त दुनिया”

पहाड़ से शहर को चिट्ठी

दिल में दबा मैं सब कुछ तो तुम्हें कभी कह ना सका मगर इस पत्ते को आज गाँव के बग़ल से होती हुई पहाड़ से शहर की ओर बहती नदी में बहा दे रहा हूँ। शायद तुम अब भी शाम ढले यमुना किनारे डूबते सूरज को देखने जाती होगी। किसी शाम जब किनारे पर नदी के पानी पैर ड़ुबाए बैठी होगी तो मेरी ये सूखी चिट्ठी तुम्हारे पैरों से आ लगेगी। उम्मीद है…

यादों का हाथ

तीसरे, से चौथे आयाम को जोड़ मैं असल दुनिया और नींद की दुनिया के बीच कहीं झूलता हुआ सुबह का इंतज़ार करने लगा। ना जाने वो सपना था या हक़ीक़त मगर मुझे अपनी उँगलियों की नोक पर तुम्हारे छुअन की गर्माहट महसूस हुई, जैसे तुमने मेरी उँगलियों के सिरे पर अपनी उँगलियों  के सिरे  रख दिये हों। मेरा रोम रोम सिहर उठा। क्या किसी दूसरे आयाम में तुमने भी मेरी ओर हाथ बढ़ाया था?

तुम सच हो या कल्पना

अंधेरी रातों में,
चाँद बन जाती हो,
सर्द सुबहों में,
गर्म चाय सी लबों को छू जाती हो,
लम्बे सफ़र की दुपहरी में,
पेड़ की छाओं सी मिल जाती हो,
जो ढलने लगे ख़यालों का सूरज,
तो रंगो सी फैल जाती हो,
तुम!
तुम सच हो या कल्पना?