Our Thoughts

Hold your thoughts for a second and world around you will pass with a whoooooshhhh.  Just like the flowing water in the above picture passed me when I sat and held my thoughts still for a moment.  Have you ever felt this?  Have you ever tried to hold your thoughts still? Have you ever realised…

अधूरापन

क्यूँ हम इतने अधूरे हैं के,किसी के साथ से ही पूरे हैं?ज़िंदगी की ये राहें, जब इतनी हसीन हैं,तो फिर इस पर चल रहे दिल, क्यूँ गमगीन हैं?क्यूँ हम किसी की चाहत में खुद को ही खो बैठते हैं?जो मिला नहीं ज़िंदगी में,जीवन भर उसी की चाह क्यूँ रखते हैं? प्यार की परिभाषा में खोना…

गंगा घाट

गंगोत्री से गंगा के घाट तक, ज़िंदगी की तलाश में,मैं आज आ पहुँचा हूँ, मृत्य तक। कई सवाल हैं मेरे ज़हन में,जो खींच लाए हैं मुझे साधुओं के इस नगर में,जीवन का तात्पर्य क्या है?अगर कर्म प्रधान इंसान को केवल कर्म करते हुए जीते रहना है,तो आखिर जीते रहने का मक़सद क्या है ?सारा जग…

Two Ducks

It was my first day in the new office. The day, when I saw her for the first time. I don’t remember anything else from that particular day but I still remember that moment, that corner seat, her half-turned neck at my entry, that frisk moment of her straight hair, an innocent mole resting on…

सर्द सुबह

वो ओस से भीगी सड़क,तेज़ हवाओं के बीच,पेड़ों के झुरमुट की झड़प,सर्दियों की सुबह,और सुनसान राहों की तलब। जमीं पर उतर आए बादलों में,हमारा ज़माने से छिप जाना,हाथों में हाथ डाल,तेरा, मेरे कंधे पर झुक जाना,जैसे बसंत में किसी टहनी काफूलों से लद जाना। पर किसी की आहट सुन,तेरा झट से अलग हो जाना,और फिर…

अफ़वाह

एक अफवाह है ज़माने में ,के कई मुसीबतें हैं दिल लगाने में ,कुछ आग के दरिया की बात करते हैं,तो कुछ मुहब्बत में फना हो जाने से डरते हैं। सुना है दिल टूटे जो किसी कातो शायर बन जाता है,और मिल जाए मुहब्बत किसी कोतो दुनिया से तर जाता है। ना जाने कुदरत की दी…

Shali Tibba – A Peak hanging from the sky

Nature gifted humans all the powers but to fly. We can run like tigers, climb on trees like monkeys, swim like fishes, evolve like apes but we cannot fly. Humans held a desire since his origin to rise above and watch the beautiful earth from the top. We even sometimes curse nature for depriving us…

संवारना सीखो

टूटे बिखरे तो हम सभी हैं,पर क्या तुम्हें संवारना आता है? किसी रोते बिलखते इंसान के आँसू पोंछ,उसे फिर से हंसाना आता है? बिना कुछ पाने की चाह रख,किसी अनजान को कुछ देना भाता है? जो ना कर सकता हर कोई,कुछ ऐसा करना आता है? टूटे बिखरे तो हैं हम सभी,पर क्या तुम्हें किसी को…

बचपन

हँसता खेलता बचपन ,खिलौनो कि लालसा से भरा बचपन,शरारतों का प्रतीक बचपन,भाई, बहन से खिलौनो के लिये लड़ता बचपन,कुछ ऐसा था मेरा बचपन। पर आज सडक पर, ये कैसा दिखा बचपन ?शरारतों से परे, गुमसुम बचपन,खिलौनो से भरा, मगर सूनी आँखों वाला बचपन,अपने खिलौने खुद ही बेचता बचपन ?गरीबी के बोझ से दबा बचपन,भूखा मगर…

अब लिखने लगा हूँ

ना जाने तुम कहाँ हो, कैसी हो,किस प्रांत, शहर, या देश जा बसी हो?सालों से तुमको सुना नहीं,चेहरा तो याद है अब भी,पर बरसों से तुमको देखा नहीं। वो तीखे नयन,गुस्से क भार उथाए,ऊँची और सिकुड़ती नाक,बड़ा सा बल खाया माथा,उस पर लटकती 1 लट,और वही सुबह की ताज़ी चाय सी मुस्कान,सब कल ही की…