शब्दों का स्वाद

शब्द उबल उबल कर,
अंदर ही अंदर पकने लगते हैं,
शब्दों की सीटी बजने लगती है,
कभी छोले की मिठास सी कविता पकती है,
तो कभी राजमा की खट्टास सा छंद,
गाहे बगाहे कहानी की कोई तरकारी भी पक जाती है।

प्रकृति का संगीत उत्सव

अब असंख्य बादल पानी बरसाए जा रहे हैं,
संगीत निरंतर बज रहा है,
झींगूर नाचे जा रहे हैं,
मेंढक टर टरा रहे हैं, 
धरती भी झूम उठी है,
महसूस  होता है,
प्रकृति आज संगीत उत्सव मना रही है,

सूखे वृक्ष का संदेश

खुद को जड़ कर,
भीतर अपना रस संजोए,
वृक्ष उस वक्त के इंतज़ार में है,
जब हवा में नमी लौट आएगी,
और प्रकृति की कठोरता पिघलने लगेगी।

तलाश

इस success के बारे में इतना सुन चुका था कि मैंने भी ठान ली, एक दिन success को पाकर ही रहूँगा और तब सारे सवाल सक्सेस से पूछूँगा। मैंने सवालों के सिलसिले को थामा और लग गया कमाने में, सक्सेस को पाने में।

वर्तमान का सूरज

मैं अब तक समझ नहीं पाया हूँ कि उस रिश्ते को कहते क्या हैं जो दो इनसानों को खामोशी के बंधन से बाँध उन्हें अपेक्षाओं के समुंदर से कहीं दूर ले जाता है। छोटी सी एक पहाड़ी के ऊपर जहाँ बैठ दोनों नीचे फैले अथाह समुंदर के छोर पर लाल सूरज को ताकते रहते हैं।

अधूरापन

क्यूँ हम इतने अधूरे हैं के,किसी के साथ से ही पूरे हैं?ज़िंदगी की ये राहें, जब इतनी हसीन हैं,तो फिर इस पर चल रहे दिल, क्यूँ गमगीन हैं?क्यूँ हम किसी की चाहत में खुद को ही खो बैठते हैं?जो मिला नहीं ज़िंदगी में,जीवन भर उसी की चाह क्यूँ रखते हैं? प्यार की परिभाषा में खोना…

गंगा घाट

गंगोत्री से गंगा के घाट तक, ज़िंदगी की तलाश में,मैं आज आ पहुँचा हूँ, मृत्य तक। कई सवाल हैं मेरे ज़हन में,जो खींच लाए हैं मुझे साधुओं के इस नगर में,जीवन का तात्पर्य क्या है?अगर कर्म प्रधान इंसान को केवल कर्म करते हुए जीते रहना है,तो आखिर जीते रहने का मक़सद क्या है ?सारा जग…

सर्द सुबह

वो ओस से भीगी सड़क,तेज़ हवाओं के बीच,पेड़ों के झुरमुट की झड़प,सर्दियों की सुबह,और सुनसान राहों की तलब। जमीं पर उतर आए बादलों में,हमारा ज़माने से छिप जाना,हाथों में हाथ डाल,तेरा, मेरे कंधे पर झुक जाना,जैसे बसंत में किसी टहनी काफूलों से लद जाना। पर किसी की आहट सुन,तेरा झट से अलग हो जाना,और फिर…

अफ़वाह

एक अफवाह है ज़माने में ,के कई मुसीबतें हैं दिल लगाने में ,कुछ आग के दरिया की बात करते हैं,तो कुछ मुहब्बत में फना हो जाने से डरते हैं। सुना है दिल टूटे जो किसी कातो शायर बन जाता है,और मिल जाए मुहब्बत किसी कोतो दुनिया से तर जाता है। ना जाने कुदरत की दी…

संवारना सीखो

टूटे बिखरे तो हम सभी हैं,पर क्या तुम्हें संवारना आता है? किसी रोते बिलखते इंसान के आँसू पोंछ,उसे फिर से हंसाना आता है? बिना कुछ पाने की चाह रख,किसी अनजान को कुछ देना भाता है? जो ना कर सकता हर कोई,कुछ ऐसा करना आता है? टूटे बिखरे तो हैं हम सभी,पर क्या तुम्हें किसी को…