सर्द सुबह

वो ओस से भीगी सड़क,तेज़ हवाओं के बीच,पेड़ों के झुरमुट की झड़प,सर्दियों की सुबह,और सुनसान राहों की तलब। जमीं पर उतर आए बादलों में,हमारा ज़माने से छिप जाना,हाथों में हाथ डाल,तेरा, मेरे कंधे पर झुक जाना,जैसे बसंत में किसी टहनी काफूलों से लद जाना। पर किसी की आहट सुन,तेरा झट से अलग हो जाना,और फिरContinue reading “सर्द सुबह”

अफ़वाह

एक अफवाह है ज़माने में ,के कई मुसीबतें हैं दिल लगाने में ,कुछ आग के दरिया की बात करते हैं,तो कुछ मुहब्बत में फना हो जाने से डरते हैं। सुना है दिल टूटे जो किसी कातो शायर बन जाता है,और मिल जाए मुहब्बत किसी कोतो दुनिया से तर जाता है। ना जाने कुदरत की दीContinue reading “अफ़वाह”

संवारना सीखो

टूटे बिखरे तो हम सभी हैं,पर क्या तुम्हें संवारना आता है? किसी रोते बिलखते इंसान के आँसू पोंछ,उसे फिर से हंसाना आता है? बिना कुछ पाने की चाह रख,किसी अनजान को कुछ देना भाता है? जो ना कर सकता हर कोई,कुछ ऐसा करना आता है? टूटे बिखरे तो हैं हम सभी,पर क्या तुम्हें किसी कोContinue reading “संवारना सीखो”

बचपन

हँसता खेलता बचपन ,खिलौनो कि लालसा से भरा बचपन,शरारतों का प्रतीक बचपन,भाई, बहन से खिलौनो के लिये लड़ता बचपन,कुछ ऐसा था मेरा बचपन। पर आज सडक पर, ये कैसा दिखा बचपन ?शरारतों से परे, गुमसुम बचपन,खिलौनो से भरा, मगर सूनी आँखों वाला बचपन,अपने खिलौने खुद ही बेचता बचपन ?गरीबी के बोझ से दबा बचपन,भूखा मगरContinue reading “बचपन”

अब लिखने लगा हूँ

ना जाने तुम कहाँ हो, कैसी हो,किस प्रांत, शहर, या देश जा बसी हो?सालों से तुमको सुना नहीं,चेहरा तो याद है अब भी,पर बरसों से तुमको देखा नहीं। वो तीखे नयन,गुस्से क भार उथाए,ऊँची और सिकुड़ती नाक,बड़ा सा बल खाया माथा,उस पर लटकती 1 लट,और वही सुबह की ताज़ी चाय सी मुस्कान,सब कल ही कीContinue reading “अब लिखने लगा हूँ”