शब्दों का स्वाद

शब्द उबल उबल कर,
अंदर ही अंदर पकने लगते हैं,
शब्दों की सीटी बजने लगती है,
कभी छोले की मिठास सी कविता पकती है,
तो कभी राजमा की खट्टास सा छंद,
गाहे बगाहे कहानी की कोई तरकारी भी पक जाती है।

Kitna mushkil hai Siddharth ka Buddha ho jaana?

बुद्ध – एक नाम जो पूरे संसार में प्रचलित है। एक इंसान जिसने विश्व कल्याण में पूरा जीवन लगा दिया और अपने ज्ञान से भगवान का दर्ज़ा पा लिया। कहते हैं संसार सिर्फ़ आपकी उपलब्धियों को याद रखता है और संघर्षों को भुला देता है। जैसे संसार ने बुद्ध के होने में सिद्धार्थ को भुला…

किताब

शादी के बरसों बाद आज घरआई थी मैं। पता ही नहीं चला के कैसे बरसों बीत गए, बीते कुछ सालों को जिया तो है मैंने मगर महसूस नहीं किया। सुना था शादी के बाद लड़की का घर पराया हो जाता है। पर नहीं पता था कि इस कदर पराया हो जाता है जैसे बचपन का…

Two Ducks

It was my first day in the new office. The day, when I saw her for the first time. I don’t remember anything else from that particular day but I still remember that moment, that corner seat, her half-turned neck at my entry, that frisk moment of her straight hair, an innocent mole resting on…

ख़ामोश बातें

आज वो मिली तो कुछ चुप चुप सी थी। खामोश, शांत, खोई हुई सी। यूँ तो कार में बैठे चंद मिनट ही बीतेkl थे उसे। पर जो शख़्स 100 शब्द प्रति मिनट की तेज़ी से बात करता हो, वो अगर 5 मिनट भी चुप बैठ जाए तो समझो ज़माना गुजर जाता है। कार की सीट…